Thursday, October 29, 2009

We Will


I will fight for you till the end of my world and blood
I will get to you through all my fears and tears
I feel you in all my dreams and screams
I wish We will have our day and say

Me Mortal

Why I have to be so far here
Why dreams have to be so bigger
Why means have to be so thinner

Don’t be surprised by my fears
These are just to get you nears
Don’t be lonely, we are lonely together

- Motivated/Inspired/Stolen from Evanescence - My Immortal

Monday, June 29, 2009

Maybe

I keep my soul enclosed somewhere, maybe in my body

I see love somewhere, maybe because I don’t see hatred

I feel pain somewhere, maybe I created in mind

I want to run somewhere, maybe just in dreams

I want to hide somewhere, maybe from myself

I want to go to heaven, maybe to see if that’s a truth

I keep myself alive, maybe just to know if I can

Monday, June 15, 2009

ढूँढता हूँ

This I wrote like few months ago. Just wrote 4 lines; thought I would add more lines in future, but could never do so. As said by some great lady (name doesn't matter, as its poem that makes a poet and not the vice-versa), a poet catches the poem flowing through air and it's never easy to catch that poem again. Though calling myself poet would be derogatory to the real poets, but still. Sorry for such a big introduction for just 4 lines of poem.

कांटो की चुभन से डरता हूँ
जलते हुए ख्वाईशो से लड़ता हूँ
दर्द--जुबा दोनों की सुनता हूँ
आहो में जीने की आस ढूँढता हूँ

Monday, May 11, 2009

I am THE

I am the voice that pain asks to speak

I am the friend that lovelorns pokes to share

I am the son that longs to see his mother

I am the arrow that has target in sight

I am the night that day is hiding behind

I am the history that future has learnt from

I am the song that I want to sing now.

Saturday, May 9, 2009

तेरे साथ कुछ और ...

तेरे भरोसे पे जां लुटाने को जी करता है
हर नाजो से पाला तूने ही था
हर मुश्किलों में संभाला तू ही थी
तेरे लिए एक और गीत गाने को जी करता है
तेरे लिए एक और आंसू सीने को जी करता है

सबकी आहो और दुर्रहो को तुने ही सहा था
हर उस पल में तेरे लिए एक और अरमा सीचा था
हर उस पल में तेरी शक्ति से ही प्रेरित था
बाटू में हर वो प्यार जो तुझसे मैंने सिखा था
सबको सिख्लाऊ सहन शक्ति और श्रमा जो तेरा जीवन था

तुझको ही देखा, धरती माँ के लिए
तुझको ही माना, किसी प्यार के लिए
तुझको ही नमन, राह दर्शित मेरे लिए
तुझसे ही आशाएं, सपने कुछ तेरे लिए

तेरे साथ फ़िर वो बचपन खेलने को जी करता है
तेरे साथ कुछ और पल जीने को जी करता है

Thursday, March 5, 2009

दूर कहीं

आख के ख्वाब आखों में ही सजे
दिल के अरमान दिल में ही उडे
आंचल देदे माँ, सब भूल जाऊ मैं
गोदी में जगह दे फ़िर से माँ
प्यार के सारे ख्वाब, उड़ने की सारी चाहतें..
तुझ में ही शांत करदे सारे
किसी से कोई शिक्वाह नही माँ, बस तेरे दामन की राहत हो
किसी गुनाह के जहनुम की परवाह नही माँ, बस तेरा हाथ मेरे सर पे हो

ले चल उसी बचपन में माँ, तेरे साथ हर पल जो बिताया
माँ मुझको सामा ले, ले चल वोही बीतें कल में, जिसमें हर वक्त तेरा ही नाम था

जीने की चाहतो से, लोगो की बातों से, अपने अरमानो से और इस जहाँ के मालिक से, .... दूर कहीं