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Monday, September 22, 2008

की कुछ तो हुआ है …..

जिंदगी की सादगी में शोर है, उठे कई अरमानों का ज़ोर है
चाहत की राहत का सोच है, इस सुनी सुनहरे शाम का दोष है
सपनो और सचाई की होड़ है, लुटे अरमानो के मोड़ है
प्यार पाने को दिल इज़तेराब है, की ये हयाते-शबाब है

- Written in a lonely red evening at this place:


Tuesday, August 19, 2008

क्या ऐसा भी कोई ...

प्यार की बातों से अनजाना वो ना जाने किस दुनिया का महमान है
मीठी मीठी बातें परदे पे देखे और पूछे क्या ऐसा भी कोई जहान है
शीशे में फिर चेहरा टटोल कर सोचे क्या इतना बुरा मैं इंसान है
सोचते सोचते आधी रात हो गई थका दिल कहे अब तो बस कर तू अब भी जवान है
यह कहे जावा है मोहब्बत हसीं है ज़माना लुटा दू जिसपे सारा जहाँ ऐसे दिल का अरमान है
इतना प्यार देके भी जो मुकर जाए क्या ऐसा भी कोई भगवान् है

Tuesday, July 29, 2008

फ़िर ...

दिल की धड़कन बिन आवाज़ के धड़कता है
सूखे होठ बिन आशा के सिये पड़े है
तन्हाई की ज़िनदगी बिन ऐतबार के दबे गडे है
कोई नही है कोई भी नही
ना दूर ना पास
एक यार है दिल की धड़कन
अपनी सच्ची आवाजों से मेरे दबे आशाओं को फ़िर से जगाती है
मेरे भूले कल को ख़ुद ही मुझे बताकर अपनों सा कोई नाता जोड़ती है
कहनो को सबसे गुमसुम है पर मुझसे सुनसुन वो करती है
वो कहते हैं बिन मिले कोई नाता नही जुड़ता
फ़िर क्यों अपने दिल की बातें मुझसे वो करती है
उसके इस भरोसे से फ़िर कुछ करने को जी करता है
उसकी कसमों वादों से फ़िर जीने को जी करता है