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Thursday, October 29, 2009

We Will


I will fight for you till the end of my world and blood
I will get to you through all my fears and tears
I feel you in all my dreams and screams
I wish We will have our day and say

Me Mortal

Why I have to be so far here
Why dreams have to be so bigger
Why means have to be so thinner

Don’t be surprised by my fears
These are just to get you nears
Don’t be lonely, we are lonely together

- Motivated/Inspired/Stolen from Evanescence - My Immortal

Saturday, May 9, 2009

तेरे साथ कुछ और ...

तेरे भरोसे पे जां लुटाने को जी करता है
हर नाजो से पाला तूने ही था
हर मुश्किलों में संभाला तू ही थी
तेरे लिए एक और गीत गाने को जी करता है
तेरे लिए एक और आंसू सीने को जी करता है

सबकी आहो और दुर्रहो को तुने ही सहा था
हर उस पल में तेरे लिए एक और अरमा सीचा था
हर उस पल में तेरी शक्ति से ही प्रेरित था
बाटू में हर वो प्यार जो तुझसे मैंने सिखा था
सबको सिख्लाऊ सहन शक्ति और श्रमा जो तेरा जीवन था

तुझको ही देखा, धरती माँ के लिए
तुझको ही माना, किसी प्यार के लिए
तुझको ही नमन, राह दर्शित मेरे लिए
तुझसे ही आशाएं, सपने कुछ तेरे लिए

तेरे साथ फ़िर वो बचपन खेलने को जी करता है
तेरे साथ कुछ और पल जीने को जी करता है

Thursday, March 5, 2009

दूर कहीं

आख के ख्वाब आखों में ही सजे
दिल के अरमान दिल में ही उडे
आंचल देदे माँ, सब भूल जाऊ मैं
गोदी में जगह दे फ़िर से माँ
प्यार के सारे ख्वाब, उड़ने की सारी चाहतें..
तुझ में ही शांत करदे सारे
किसी से कोई शिक्वाह नही माँ, बस तेरे दामन की राहत हो
किसी गुनाह के जहनुम की परवाह नही माँ, बस तेरा हाथ मेरे सर पे हो

ले चल उसी बचपन में माँ, तेरे साथ हर पल जो बिताया
माँ मुझको सामा ले, ले चल वोही बीतें कल में, जिसमें हर वक्त तेरा ही नाम था

जीने की चाहतो से, लोगो की बातों से, अपने अरमानो से और इस जहाँ के मालिक से, .... दूर कहीं

Wednesday, April 2, 2008

वो एक ... है

बिन खेले भी जिससे मस्त हो जाऊ ऐसा कौन सा काम है

बिन शबाब के भी झूमु ऐसा कौन सा जाम है

बिन सोचे भी जो ख्याल हर वक्त सोचो में समा है

बिन देखे भी जिसका उन्स रूह में रमा है


बिन मांगे जो प्यार दे वो एक माँ है


रूह से उसका नाता जनम से पहले का है

हर छोटे चीज़ का जो रखे ख्याल है

झूमने के लीये अब उसकी यादें ही काफ़ी है

मस्ती में डूब जाऊ जब सोचु इतनी प्यारी मेरी माँ है

Tuesday, March 11, 2008

फीर तेरी याद आई .....

सुनने को जब धुन्दू कोई
रोने को सर धुन्दू कोई
दर्द छुपाने को परदा धुन्दू कोई
याद करने को याद धुन्दू कोई

धुन्दू में कई चीज़ें

पर तेरा साथ है हर पल
इसका यकीन है मुझे हर पल
कहनो को शब्द नही
बतलाने का साहस नही

शब्द की कमी , साहस की कमी नही खलती फीर भी
नही लगता बुरा लोगो की बेपर्वाई भी
बस तेरे आंचल और सख्त हाथ की याद आती है
आँचल था ऐसा जो मेरे वजह से हर वक्त गन्दा था
हाथ जो मुझे छुकर नर्म पड़ जाता था

सबकी कीमत अब याद आती है
तुझे ना खो दू डर लगता है
रहने है तुझे मेरे साथ यह तो पक्का है

Wednesday, March 5, 2008

ख़त मिला है घर से.....

ख़त मिला है घर से

लिखावट मेरे माँ की है

पर बातें उसकी नही
सजावट मेरे माँ की है
पर खूबसूरती उसकी नही
प्यार यह मेरे माँ की है
पर यह जस्बात उसका नही
ख़त मिला है घर से
पर यह ख़त उसका नही

Wednesday, February 20, 2008

काहे को दुनीया बनाई

दुनीया बनानेवाला क्या तेरे मन में समाई

काहे को दुनीया बनाई


काहे बनाया तुने माँ यह प्यारी

जीस्में बसाया सहने का शीतल जल

कोई छ्वी तो होगी आँखों में तेरी

काहे दीया प्यार इतना की जो सारी िंजंदगी साथ दे

Tuesday, January 15, 2008

मेरी माँ .....


दर्द पी के भी तुझसे जुदा क्यों हूँ माँ
कया दर्द ये काफी नही रुलाने को माँ
मेरी माँ
मैं कभी रातों मैं दर्द छुपाता
हूँ माँ
अँधेरे मैं तुझको धुन्दता हूँ माँ
तेरी तस्वीर देखकर
िदल मैं छुपाता हूँ माँ
कभी उठ ना पाऊ दर्द में ,फीर से उठाले मुझे माँ
आंसू दर्द में आते नही, पर तुझे पास ना देख कर गीर पड़ते है वो आंसू
यूं तो कीसी को खबर नही, पर तुझे सब पता है ना मेरी माँ
क्या इतना बुरा हू मैं , माँ......

Friday, December 28, 2007

नौ महीने की िंजंदगी


दर्द छूपा के जीयु की दर्द भुला के जीयु
जीयु मैं कैसे भी बस तेरे लीये जीयु
सब के लीये तू एक औरत है मेरे लीये माँ है
जीसकी वजह से िंजंदगी मेरी नौ महीने ज्यादा है
अब तू कोई दर्द ना छूपा ना कोई गीला िदल में दबा
की अब इतना काबील हू की खुशीयों में होगी तू रवा

Friday, December 21, 2007

सबसे जुड़ा एक नाम है


















िदल
के अरमान तेरे दीये इस माँ पे कुर्बान है
सबसे प्यारा मेरी िंजदंगी का जो मान है
प्यार से प्यारा हर रीश्ते से बुना उसी का नाम है
उसके आंचल पे सर रखके दम नीक्ले येही अरमान है

*Above picture is a symbol of Mother's Love

Wednesday, December 19, 2007

कटी पतंग



हर वक़्त खीचा हर वक़्त तना हूँ

तेरे इस डोर से हर वकत जुडा हूँ

मेरी आरजू थी कभी खुद से उडू

खुद ही हर दिशा में बहु और सजू


पर डोर टूटी तो क्यों भाव वीभोर हूँ

और इस आज़ादी में एक अद्श्य डोर है

सोचे क्यों तेरा साथ सबसे प्यारा है

जिसके लिए जिंदगी का हर डोर गवारा है

सबसे जुदा यह माँ


ना कोई है इस ज़माने में तुझसे बढकर

पाया तेरा प्यार और लाड दुलार हर मोड़ पर

ख़ुशी इतनी दी तुने अपने सारे गमों को छुपाकर

पूरे होंगे तेरे हर अरमान जो तुने भुलाया मुझपर